पेपर लीक के बाद बड़ा फैसला: 21 जून 2026 को अगली नीट परीक्षा ,अगले साल से कंप्यूटर बेस्ड होगी NEET परीक्षाशिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की घोषणा; 3 मई को रद्द हुई नीट-यूजी परीक्षा अब 21 जून को होगी, अगले वर्ष से ओएमआर शीट खत्म।नई दिल्ली/पटना, 15 मई 2026।देश भर के लाखों मेडिकल छात्रों के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार ने एक बेहद अहम और ऐतिहासिक फैसला लिया है। हाल ही में हुई राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG-2026) के पेपर लीक विवाद के बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव की घोषणा की है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अगले शैक्षणिक सत्र से नीट यूजी परीक्षा पारंपरिक ओएमआर (OMR) शीट के बजाय पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी। गौरतलब है कि 3 मई 2026 को आयोजित हुई नीट परीक्षा को पेपर लीक की पुष्ट खबरों के बाद रद्द कर दिया गया था। अब यह परीक्षा नए सिरे से 21 जून 2026 को आयोजित कराई जाएगी। इस फैसले का सीधा असर बिहार, झारखंड सहित देश भर के उन लाखों परीक्षार्थियों पर पड़ेगा जो हर साल मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का सपना देखते हैं।क्या है पूरा मामला और क्यों लिया गया यह निर्णय?भारत में मेडिकल स्नातक पाठ्यक्रमों (MBBS, BDS आदि) में प्रवेश के लिए नीट (NEET) एकमात्र सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा है। 3 मई 2026 को पूरे देश में इस परीक्षा का आयोजन किया गया था। लेकिन परीक्षा संपन्न होने के कुछ ही घंटों के भीतर देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर बिहार और कुछ अन्य राज्यों से प्रश्नपत्र लीक होने की खबरें सामने आने लगीं। प्रारंभिक जांच में इन आरोपों में सत्यता पाए जाने के बाद प्रशासन और शिक्षा मंत्रालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरी परीक्षा को ही रद्द घोषित कर दिया।इस घटना से देश भर के लगभग 25 लाख से अधिक छात्रों और उनके अभिभावकों में भारी आक्रोश और निराशा फैल गई थी। छात्रों की मेहनत और परीक्षा की शुचिता को ध्यान में रखते हुए सरकार पर दबाव था कि वह एक ऐसा फूलप्रूफ सिस्टम बनाए जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसी के मद्देनजर व्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए ओएमआर (OMR) आधारित पेन-पेपर टेस्ट को खत्म कर कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) का मॉडल अपनाने का निर्णय लिया गया है।केंद्रीय शिक्षा मंत्री का बयान और सरकारी रुखशुक्रवार को नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने परीक्षा के नए स्वरूप और सरकार की मंशा को स्पष्ट किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"अगले साल से नीट यूजी परीक्षा ओएमआर शीट की जगह पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी। हमारा प्राथमिक लक्ष्य परीक्षा की शुचिता, निष्पक्षता और पारदर्शिता को हर हाल में बनाए रखना है।"— धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, भारत सरकारइसके साथ ही मंत्रालय की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि:"पेपर लीक जैसी आपराधिक और निंदनीय घटनाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 21 जून 2026 को होने वाली आगामी पुनर्परीक्षा को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा पूरी सुरक्षा और अभेद्य निगरानी के साथ संपन्न कराया जाएगा।"— आधिकारिक प्रवक्ता, शिक्षा मंत्रालयओएमआर (OMR) से सीबीटी (CBT) की ओर: क्या होगा बदलाव?अब तक नीट परीक्षा में छात्रों को एक प्रश्नपत्र पुस्तिका और एक ओएमआर शीट दी जाती थी, जिसमें उन्हें काले या नीले पेन से गोले भरने होते थे। इस प्रणाली में प्रश्नपत्रों की छपाई से लेकर उन्हें देशभर के हजारों परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने की एक लंबी और जटिल भौतिक प्रक्रिया शामिल होती है। इसी ट्रांसपोर्टेशन या सेंटर मैनेजमेंट के दौरान सेंधमारी और पेपर लीक का खतरा सबसे अधिक रहता है।कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) में यह पूरी भौतिक प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। सीबीटी मोड में प्रश्नपत्र सीधे एक सुरक्षित सर्वर से एन्क्रिप्टेड (encrypted) फॉर्म में परीक्षा के समय ही परीक्षार्थी के कंप्यूटर स्क्रीन पर लाइव होते हैं।सुरक्षा: इसमें परीक्षा शुरू होने से पहले किसी भी स्तर पर पेपर लीक होने की गुंजाइश लगभग शून्य हो जाती है।जंबलिंग (Jumbling): हर छात्र के कंप्यूटर पर प्रश्नों का क्रम अलग-अलग हो सकता है, जिससे परीक्षा केंद्र के भीतर भी नकल करना असंभव हो जाता है।गलती सुधारने का विकल्प: ओएमआर में एक बार पेन से गोला भर देने के बाद उत्तर बदला नहीं जा सकता, जबकि सीबीटी में छात्र परीक्षा खत्म होने से पहले अपने उत्तर को बदल और सुधार सकते हैं।बिहार और झारखंड के छात्रों एवं ग्रामीण क्षेत्रों पर प्रभावडिजिटल न्यूज़ पोर्टल के नजरिए से देखें तो इस बड़े फैसले का गहरा असर बिहार और झारखंड के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के छात्रों पर पड़ना तय है। इन दोनों राज्यों से हर साल लाखों की संख्या में मेधावी छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बैठते हैं। जहां एक ओर सीबीटी मोड से पेपर लीक माफियाओं पर लगाम कसेगी, जो अक्सर इन राज्यों में सक्रिय पाए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवेश के छात्रों के लिए यह एक नई चुनौती भी पेश कर सकता है।कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कंप्यूटर शिक्षा और डिजिटल साक्षरता का अभाव है। कंप्यूटर पर बैठकर तीन घंटे से अधिक समय तक स्क्रीन पर प्रश्न पढ़ना और माउस के जरिए उत्तर देना उन छात्रों के लिए असहज हो सकता है जो जीवन भर किताबों और पेन-पेपर से पढ़ते आए हैं। शिक्षाविदों का मानना है कि सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को अगले साल से पहले देश भर में, विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में 'मॉक टेस्ट सेंटर्स' स्थापित करने होंगे ताकि छात्र इस नई प्रणाली के अभ्यस्त हो सकें।21 जून की पुनर्परीक्षा: प्रशासनिक चुनौतियांफिलहाल सबसे बड़ी चुनौती 21 जून 2026 को होने वाली पुनर्परीक्षा है