माधोपुर / पश्चिम चंपारण (बिहार): संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2026 को International Year of Women Farmers घोषित किए जाने के बाद देशभर में महिला किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में पहल तेज हो गई है। इसी कड़ी में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर में “कृषिरत महिलाओं को कृषि-खाद्य प्रणाली में सुदृढ़ करने हेतु एक दिवसीय संवेदीकरण सह जागरूकता कार्यशाला” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम All India Coordinated Research Project (AICRP) के अंतर्गत संचालित किया गया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिला किसानों की भागीदारी बढ़ाना और स्थानीय कृषि-खाद्य प्रणाली को मजबूत बनाना है।1. महिला नेतृत्व से मजबूत होगी कृषि-खाद्य प्रणालीकार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. उमाकांत बहेरा ने कहा कि महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र की रीढ़ हैं। उन्होंने बताया कि यदि महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिले, तो Agri-Food System को अधिक सुदृढ़ और टिकाऊ बनाया जा सकता है। उन्होंने सफल महिला उद्यमी Krishna Yadav का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उन्होंने मात्र ₹500 से शुरुआत कर आज 5 करोड़ रुपये का अचार व्यवसाय खड़ा किया है।2. तकनीकी सहयोग और उद्यमिता पर विशेष जोरस्नातकोत्तर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मयंक राय ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं के सहयोग से नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व से ही कृषि-खाद्य प्रणाली मजबूत हो सकती है। उन्होंने Meghalaya Model of Women Empowerment का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां पारिवारिक संपत्ति सबसे छोटी बेटी को दी जाती है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है।कार्यक्रम के दौरान महिला किसानों को Organic Farming Techniques, Nutrition Enhancement, और Group-based Entrepreneurship Models की जानकारी दी गई। साथ ही, Secondary Agriculture Products और मूल्य संवर्धन पर भी चर्चा हुई, जिससे ग्रामीण महिलाओं को अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं।3. ग्रामीण महिलाओं के लिए तकनीकी और प्रशिक्षण पहलकार्यक्रम समन्वयक डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने कहा कि Sustainable Kitchen Garden मॉडल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय पश्चिम चंपारण जिले में जल्द ही Krishi Gram Gyan Kendra की स्थापना करेगा, जिससे ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और नवाचार से जोड़ने में मदद मिलेगी।सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. उषा सिंह ने कहा कि महिला किसानों को कृषि-खाद्य प्रणाली में शामिल करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने मातृ एवं शिशु पोषण पर जोर देते हुए बताया कि महिलाएं न केवल कृषि उत्पादन बल्कि परिवार के पोषण स्तर को भी सुधार सकती हैं।4. महिलाओं की भागीदारी से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्थापरियोजना के मुख्य अन्वेषक डॉ. संगीता देव ने Entrepreneurship Development और नए उत्पाद निर्माण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने महिलाओं को Value Addition और Agri Processing के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. सुधानंद प्रसाद लाल ने कहा कि यदि भारत में महिलाओं को समान अवसर मिलें, तो आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग 90 लाख करोड़ रुपये तक का योगदान संभव है।5. विशेषज्ञों और अधिकारियों की उपस्थितिकार्यशाला में आरके निखिल (जिला परियोजना प्रबंधक, पश्चिम चंपारण, JEEViKA), डॉ. सविता कुमार, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. शिप्रा कुमारी सहित कई वैज्ञानिक और विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक डॉ. गीतांजलि चौधरी ने किया।Women Farmers International Year 2026Women Empowerment in AgricultureAgri Food System IndiaRural Women EntrepreneurshipOrganic Farming IndiaKitchen Garden ModelAgricultural Training Women IndiaSecondary Agriculture ProductsBihar Agriculture NewsKrishi Vigyan Kendra Madhopur#WomenFarmers2026#MahilaKisan#WomenEmpowerment#AgriFoodSystem#OrganicFarming#RuralEntrepreneurship#KrishiVigyanKendra#BiharAgriculture#KitchenGarden#WomenInAgriculture